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तिरुपति बालाजी मंदिर कहा है | Tirupati Balaji Mandir Kaha Hai

तिरुपति बालाजी मंदिर कहा है | Tirupati Balaji Mandir Kaha Hai

आज हम जानेंगे Tirupati Balaji Mandir Kaha Hai? भक्तो के गहरे आस्था से जुड़ा हुआ ये मंदिर आखिर कहा स्थित है? ये हम इस पोस्ट में बताएंगे.

Tirupati Balaji Mandir Kaha Hai :- आंध्र प्रदेश राज्य में चित्तूर जिल्हे के तिरुमाला पहाड़ियों पर तिरुपति  बालाजी का मंदिर है.

तिरुपति बालाजी मंदिर के बारे में सामान्य जानकारी :- तिरुमाला पहाड़ियों में स्थित ये मंदिर विश्व के सबसे संपन और प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है. लाखों भक्तों की इस मंदिर के प्रति श्रद्धा और आस्था जुडी हुई है. तिरुपति बालाजी मंदिर विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है. इस मंदिर को श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. जो की भगवान विष्णु का रूप है. वेंकटेश्वर को कई अन्य नामों से जाना जाता है, बालाजी, गोविंदा और श्रीनिवास.

तिरुमाला पहाड़ी  'शेषचलम पहाड़ी'  रेंज का इक हिस्सा हैं. पहाड़ समुद्र तल से ८५३ मीटर (२,७९९ फीट) ऊपर हैं. पहाड़ी में सात चोटियां शामिल हैं, जो आदिसा के सात प्रमुखों का प्रतिनिधित्व करती हैं. मंदिर सातवें शिखर पर स्थित है. वेंकटाद्री  पवित्र जल की टंकी श्री स्वामी पुष्करिणी के दक्षिणी तट पर स्थित है. इसलिए मंदिर को "सेवन हिल्स का मंदिर" भी कहा जाता है. तिरुमाला शहर लगभग १०.३३ वर्ग मील (२६.७५ किमी २) क्षेत्र में फैला है.

मंदिर में प्रतिदिन लगभग ५०,००० से १,००,००० तीर्थ यात्री जाते हैं. जबकि विशेष अवसरों और त्यौहारों पर वार्षिक ब्रह्मोत्सवम की तरह तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ जाती है, ५००,००० इसे दुनिया में सबसे अधिक देखी जाने वाली पवित्र जगह बनाते हैं. यह दान और प्राप्त के मामले मे दुनिया का सबसे अमीर मंदिर है. इस मंदिर की इक खास बात ये है की.यहाँ सच्चे मन से मांगी हुई हर मुराद पूरी होती है. इसलिए यहाँ दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आ जाते है. भक्तो और पर्यटकोंकी यहाँ हर रोज भीड़ होती है.  

यह अद्भुत मंदिर के बारे कहा जाता है, की यहाँ मौजूद भगवान की प्रतिमा से समुद्री लेहेरोंकी आवाज सुनाई देती है. इससे भी आश्चर्य जनक बात ये हे की यहाँ प्रतिदिन ३ लाख लड्डू प्रशाद में बनते है. और तो और इस लड्डू को बनाने के लिए यहाँ के कारीगर तीन सौ साल पुरानी विधि का उपयोग करते है. इन लड्डू को बालाजी मंदिर के गुप्त रसोई में बनाया जाता है. इस रसोई का नाम पोटू है.  

हुंडी (दान पात्र) :- यह माना जाता है, कि श्रीनिवास (भगवान) को अपनी शादी की व्यवस्था करनी थी, रानी पद्मावती के साथ विवाह के लिए. कुबेर ने वेंकटेश्वर (भगवान विष्णु का एक रूप) को धन दिया. श्रीनिवास ने कुबेर से एक करोड़ और ११.४ दशलक्ष्य  (११,४००,०००) सोने के सिक्के मांगे और दिव्य वास्तुकार विश्वकर्मा के पास शेषाद्रि पहाड़ियों में स्वर्गीय परिवेश का निर्माण किया. साथ में, श्रीनिवास और रानी पद्मावती सभी अनंत काल तक जीवित रहे, जबकि देवी लक्ष्मी, विष्णु की प्रतिबद्धताओं को समझते हुए, उनके दिल में हमेशा के लिए रहने का विकल्प चुना. इसलिए भक्त तिरुपति में वेंकटेश्वर के हुंडी (दान पात्र) में धन दान करने जाते हैं. ताकि वह उसे कुबेर को वापस भुगतान कर सकें. हुंडी संग्रह एक दिन में २२.५ दशलक्ष (२२,५००,०००) तक जाता है.

थुलबाराम :- थुलबारम अनुष्ठान में, एक भक्त वजन संतुलन के एक भाग पर बैठता है और दूसरा भाग भक्त के वजन से अधिक सामग्री से भरा होता है. भक्त आमतौर पर चीनी, गुड़, तुलसी के पत्ते, केला, सोना, सिक्के चढ़ाते हैं. यह ज्यादातर नवजात शिशुओं या बच्चों के साथ ही किया जाता है.

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