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ये है भारत की पहली महिला डॉक्टर | Bharat Ki Pehli Mahila Doctor

Bharat Ki Pehli Mahila Doctor

जानेगे bharat ki pehli mahila doctor का नाम। आज आपको हर क्षेत्र में महिला डॉक्टर दिख सकती है। लेकिन क्या आप जानते है क्या भारत की पहली महिला डॉक्टर कौन है, नहीं तो आपको एस प्रश्न का ans. आपको यहाँ पर मिल जायेगा, हम उनका जीवन परिचय भी पत्ता करेंगे।

भारत की पहली महिला डॉक्टर कौन है?


भारत की पहली महिला डॉक्टर "आनंदीबाई जोशी " है। इनका पूरा नाम आनंदी गोपाल जोशी और आनंदीबाई गोपालराव जोशी नाम से भी जाना जाता है। आनंदी गोपाल जोशी का जन्म 31 मार्च 1865 को वर्तमान महाराष्ट्र के ठाणे जिले में कल्याण में हुआ था। यमुना ये इनका आनंदी जोशी पुराना नाम है। शादी के बाद उनके पति ने इनका नाम आनंदी रखा।

आनंदी गोपाल जोशी का परिवार ब्रिटिश राज के दौरान जमींदार का काम करता था। लेकिन अंग्रेजों द्वारा अत्यधिक करों के कारण, इनका जमींदार का बिज़नस घाटे में चला गया। उन्नीसवीं सदी के मध्य में विवाह कम उम्र में हो जाते थे, इसके कारन आनंदीबाई जोशी के उपर नौ साल की उम्र में शादी करने का दबाव डाला गया था और इनकी शादी गोपालराव जोशी जो इनसे 20 साल बढे थे इनसे की गयी।

आनंदीबाई जोशी कैसे भारत की पहली महिला डॉक्टर बनी


आनंदीबाई जोशी के पति गोपालराव जोशी को उस वक्त एक प्रगतिशील विचारक माना जाता था। गोपालराव जोशी महिला शिक्षा के प्रबल समर्थक थे, लेकिन उन्नीसवीं सदी के मध्य में महिला शिक्षा करना मुश्किल था। आनंदीबाई जोशी को चौदह साल के उम्र में बहुत बड़े दुख का सामना करना पड़ा था। इसकी वजह, सही चिकित्सा न मिलने के कारन और सुविधाओं की कमी के कारण दस दिनों में उसके बच्चे की मृत्यु हो गई थी। इस दुख के करान आनंदीबाई जोशी ने भारत में स्वास्थ्य सेवा के बारे में कुछ करने का फैसला किया और ये बात अपने पति गोपालराव जोशी को बोल दिया। उनके पति ने एस फैसले का समर्थन किया और अध्ययन करने के लिए पूरी तरह से permission दे दिया।

आनंदी के पति ने एक अमेरिकी मिशनरी रॉयल वाइल्डर को एक पत्र भेजा और संयुक्त राज्य में औषधि अध्ययन के बारे में पूछा। 1883 में गोपालराव जोशी ने अध्ययन के लिए आनंदीबाई को अमेरिका भेजने का फैसला किया। वुमन्स मेडिकल कॉलेज ऑफ़ पेन्सिल्वेनिया आनंदीबाई जोशी शिक्षा प्राप्त की, जब वह 1886 में भारत लौटीं, तो उनका भव्य स्वागत हुआ और उन्हें कोल्हापुर में Albert Edward Hospital में प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया।

उनका एक सपना अधुरा रहा, आनंदीबाई जोशी महिलाओं केलिए अपना मेडिकल कॉलेज खोलन चाहती थी। लेकिन 26 फरवरी 1887 को, अपने 22 वें जन्मदिन से ठीक एक महीने पहले आनंदी गोपाल जोशी की टीबी के कारन मृत्यु हो गई। उनके निधन पर पुरे देश में शोक व्यक्त किया गया। आज के वक्त आनंदीबाई जोशी का व्‍यक्तित्‍व महिलाओं के लिए प्रेरणास्‍त्रोत है और ये भारत के लिए बहुत सन्मान की बात है।

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